




















H297 Swami Vivekananda Ki kathayein Aur Drishtanta (स्वामी विवेकानन्द की कथाएँ और दृष्टान्त)
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स्वामी विवेकानन्द की कथा-प्रस्तुति की शैली के प्रसंग में उनके एक अमेरिकी अनुरागी श्री फ्रैंक रोडहैमेल ने लिखा है, “अपनी अननुकरणीय शैली में पौराणिक कथाएँ बोलते समय वे उन्हें ऐसा सजीव कर डालते कि वक्तव्य विषय – उनकी अनुपम व्याख्या शैली का उपयोग करने का सुयोग देता और चेहरे पर विभिन्न भाव-भंगिमाएँ लाने की क्षमता, जो उनके व्यक्तित्व की सर्वाधिक आकर्षक चीज थी – कथाएँ सुनाते समय उन्हें भी पूरा मौका मिलता। वे बताते, ‘इन कहानियों को सुनाना मुझे बड़ा प्रिय है; इन्हीं में भारत की प्राणशक्ति निहित है। मैं इन्हें बचपन से ही सुनता आया हूँ और इन्हें सुनाते मैं कभी थकता नहीं।’ ”
इसी प्रसंग में भगिनी क्रिस्टिन लिखती हैं, “उनके पास रोचक कहानियों का भण्डार था, जिनमें से कुछ वे बारम्बार सुनाया करते थे। उनमें से एक थी एक मिशनरी के बारे में, जिसे धर्मप्रचार के लिए नरभक्षियों के द्वीप में भेजा गया था। वहाँ पहुँचकर उसने स्थानीय लोगों से पूछा, मेरा पूर्ववर्ती मिशनरी आप लोगों को कैसा लगा? इस पर उसे उत्तर मिला, ‘वह तो बड़ा ही स्वादिष्ट था!’ एक दूसरी कहानी अफ्रीकी मूल के एक प्रचारक के विषय में थी। वह आदम की सृष्टि की कथा बता रहा था। वह बोला, ‘ईश्वर ने आदम को बनाया और उसे सूखने के लिए चहारदीवारी पर डाल दिया।’ तभी श्रोताओं में से कोई बाधा डालते हुए बोल उठा, ‘भाई साहब, ज़रा ठहरिए। पहले यह बताइये कि उस चहारदीवारी को किसने बनाया था?’ इस पर उस प्रचारक ने मंच पर सामने की ओर झुककर कहा, ‘अरे भाई, ऐसे प्रश्न करने से तो हमारा पूरा धर्मशास्त्र ही नष्ट हो जाएगा!’
स्वामी विवेकानन्द १८वीं शताब्दी के महानतम वक्ताओं में एक थे। वे अपने व्याख्यानों तथा कक्षाओं को विभिन्न प्रकार की कथाओं तथा दृष्टान्तों के उपयोग के द्वारा सजीव कर डालते थे। उनका पूरा साहित्य – उपाख्यानों, उदाहरणों, उपमाओं तथा दृष्टान्तों से परिपूर्ण है, जो मानव-स्वभाव के विषय में उनकी गहन अन्तर्दृष्टि को दर्शाते हैं। वर्तमान संकलन की अधिकांश सामग्री – उनके द्वारा देश-विदेश के विभिन्न स्थानों में दिये गये उनके व्याख्यानों तथा वार्तालापों में से संकलित, अनुवादित तथा सम्पादित किया गया हैं।
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- Compiler/EditorSwami Videhatmananda
- TranslatorSwami Videhatmananda
